म.स. और ल.स.: जो शब्द यहाँ की किताबों में हैं
- अंश ऊपर की संख्या है, हर नीचे की।
- लघुत्तम समापवर्त्य (ल.स.) — हरों का सबसे छोटा साझा गुणज, जिससे जोड़ और घटाव के लिए हर समान किए जाते हैं।
- महत्तम समापवर्तक (म.स.) — सबसे बड़ा साझा भाजक, जिससे भिन्न सरल की जाती है।
- विषम भिन्न में अंश हर से बड़ा होता है; मिश्रित संख्या उसी मान का दूसरा रूप है: पूर्ण भाग और भिन्न।
- व्युत्क्रम — उलटी हुई भिन्न, और भाग की कुंजी।
अंग्रेज़ी की किताबें GCD और LCM लिखती हैं; यहाँ की कक्षाओं में वही चीज़ें म.स. और ल.स. कहलाती हैं। ऊपर के चरण वही शब्द इस्तेमाल करते हैं जो छात्र की किताब में हैं, अनुवाद किए हुए नहीं।
तीन सबसे आम ग़लतियाँ
पहली: हर अलग होने पर भी अंश जोड़ देना। 1/2 + 1/3 का जवाब 2/5 नहीं है — वह दो अलग आकार के टुकड़ों को एक जैसा मानकर जोड़ना है। दूसरी: सरल करना भूल जाना। जवाब 2/4 ग़लत नहीं है पर अधूरा है; चाहिए 1/2। तीसरी: मिश्रित संख्या को सीधे गुणा करना। 1 1/2 गुणा 2 का जवाब 2 1/2 नहीं है — पहले 3/2 बनाइए, फिर गुणा कीजिए।
ऊपर की चरण-सूची इन्हीं तीन ग़लतियों के लिए है: वह हर चरण अलग करके दिखाती है ताकि जवाब कहाँ से आया यह दिखे, सिर्फ़ जवाब नहीं।
सवा, डेढ़ और ढाई: भिन्नों के अपने नाम
यहाँ की भाषा में कुछ भिन्नों के लिए अलग शब्द हैं, और वे रोज़ इस्तेमाल होते हैं — गणित की कक्षा में नहीं, बल्कि दुकान, रसोई और घड़ी में।
- सवा = एक चौथाई ज़्यादा — सवा एक यानी 1¼, सवा दो यानी 2¼
- डेढ़ = 1½ और ढाई = 2½ — ये दोनों पूरी तरह अपने ही शब्द हैं, किसी संख्या से बने नहीं
- साढ़े = आधा ज़्यादा — साढ़े तीन यानी 3½ (डेढ़ और ढाई के बाद से ही यह शब्द चलता है)
- पौने = एक चौथाई कम — पौने दो यानी 1¾
ध्यान देने वाली बात यह है कि डेढ़ और ढाई किसी नियम से नहीं बनते। साढ़े तीन, साढ़े चार, साढ़े पाँच सब एक ही ढाँचे पर हैं, पर 1½ और 2½ के अपने अलग शब्द हैं — और यही वह जगह है जहाँ अनुवाद से बनी सामग्री «साढ़े एक» जैसा कुछ लिख देती है, जो कोई नहीं बोलता।
कैलकुलेटर भिन्न अंकों में दिखाता है, क्योंकि गणना का रूप वही है — पर आप इन्हें असल ज़िंदगी में इन्हीं शब्दों में सुनेंगे।
सामान्य सवाल
1/2 + 1/3?
5/6 — 3/6 और 2/6 बनाने के बाद।
जोड़ते कैसे हैं?
हर समान कीजिए, अंश जोड़िए, फिर सरल कीजिए।
12/18 सरल?
2/3 (महत्तम समापवर्तक 6 है)।
मिश्रित संख्या?
पूर्ण × हर + अंश; उल्टा भागफल और शेषफल से।
भाग में उलटी क्यों?
किसी संख्या से भाग देना उसके व्युत्क्रम से गुणा करना है।