पढ़ने के समय का कैलकुलेटर

आपके टेक्स्ट को पढ़ने में कितना समय लगेगा, और ज़ोर से पढ़ने में कितना। टेक्स्ट चिपकाइए, गिनती तुरंत हो जाएगी, या सीधे शब्दों की संख्या डाल दीजिए।

शब्द से समय की तालिका (सामान्य गति)

शब्दमन में (240 शब्द/मिनट)ज़ोर से (140 शब्द/मिनट)
1000:250:43
2501:031:47
5002:053:34
7503:085:21
1,0004:107:09
1,5006:1510:43
2,0008:2014:17
2,50010:2517:51
3,00012:3021:26
5,00020:5035:43
7,50031:1553:34
10,00041:401:11:26

समय मिनट:सेकंड में है (एक घंटे के बाद घंटे:मिनट:सेकंड)। ऊपर का नतीजा आपकी चुनी हुई गति से बनता है; यह तालिका सामान्य गति पर टिकी रहती है।

क्या गिना जाता है और क्या नहीं

गिनती टेक्स्ट को स्पेस पर तोड़ती है। हिंदी के लिए यह ठीक चलता है, और एक बात जिसकी लोग चिंता करते हैं वह पहले से सही है: मात्राएँ और संयुक्त अक्षर गिनती नहीं बदलते, क्योंकि गिनती अक्षरों की नहीं, स्पेस से अलग हुए शब्दों की है।

एक असली अंतर ज़रूर है: परसर्ग अलग लिखे जाते हैं। «राम का घर» तीन शब्द हैं जबकि उसी अर्थ की अंग्रेज़ी दो में आ सकती है। इससे उसी सामग्री के लिए शब्द कुछ बढ़ जाते हैं, पर असर उतना बड़ा नहीं कि अलग गति गढ़ी जाए।

जो बिल्कुल नहीं गिना जाता वह है मेहनत। तकनीकी लेख उतने ही शब्दों की कहानी से धीरे पढ़ा जाता है, और यह फ़र्क़ शब्द गिनकर कोई कैलकुलेटर नहीं देख सकता।

भाषण और प्रस्तुति के लिए ज़ोर से वाली संख्या ज़्यादा काम की है

ज़ोर से पढ़ने वाला आँकड़ा पढ़ने से ज़्यादा बोलने पर लागू होता है, क्योंकि भाषण का टेक्स्ट बोलने के लिए ही लिखा जाता है। 140 शब्द प्रति मिनट पर: तीन मिनट की प्रस्तुति के लिए लगभग 420 शब्द, और दस मिनट के भाषण के लिए लगभग 1,400 शब्द

दो व्यावहारिक सुधार। पहला, मंच पर ज़्यादातर लोग अभ्यास से तेज़ बोलते हैं, इसलिए थोड़ा छोटा लिखना बेहतर है। दूसरा, ठहराव गिने नहीं गए हैं — स्लाइड बदलना, तालियों का इंतज़ार, पानी का घूँट। लगभग दस प्रतिशत का मार्जिन छोड़िए।

काम के पैमाने

ख़बर आम तौर पर 300 से 500 शब्दों की होती है, यानी एक से दो मिनट मन में पढ़ना। लंबा ब्लॉग लेख 1,200 से 2,000 शब्द, यानी पाँच से आठ मिनट। किताब का एक अध्याय लगभग 5,000 शब्द, यानी क़रीब बीस मिनट। ऊपर की तालिका इन्हीं आम आकारों पर बनी है।

सामान्य सवाल

1,000 शब्दों में कितना समय?

≈ 4 मिनट 10 सेकंड मन में, 7 मिनट 9 सेकंड ज़ोर से।

गतियाँ कहाँ से?

अंग्रेज़ी अध्ययनों से; हिंदी में समकक्ष अध्ययन नहीं है।

हिंदी में शब्द ज़्यादा?

थोड़े — परसर्ग अलग लिखे जाते हैं; असर छोटा है।

मात्राएँ गिनती बदलती हैं?

नहीं — गिनती स्पेस पर है, अक्षरों पर नहीं।

सटीकता चाहिए?

500 शब्दों का समय लीजिए, दो से गुणा कीजिए, डाल दीजिए।